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मानसून सिर पर, गड्ढे में मिट्टी, डूबेगा शहर – नगर परिषद ने 37 लाख खर्च कर करवाई थी डिसिल्टिंग -अब आरएसआरडीसी गड्ढे में मिट्टी डालकर कर रही है समतल – गुरुनानक बस्ती का गड्ढा बंद होने के कगार पर

श्रीगंगानगर। नगर परिषद व सरकार का आपस में सामंजस्य नहीं होने के कारण लाखों रुपए के सरकारी खजाने को मिट्टी में मिलाया जा रहा है। इतना ही नहीं मानसून सिर पर होने के बावजूद भी गुरुनानक बस्ती वाले गड्ढे को बिना सोचे समझे बंद किया जा रहा है, जबकि एसटीपी शुरू होने का अभी तक कोई नामों निशान नहीं। ऐसे में मानसून के दौरान आने वाली बारिश में शहर के हालात बिगड़ सकते हैं।
जानकारी के अनुसार नगर परिषद की ओर से गुरुनानक बस्ती के गड्ढे की कुछ समय पहले 37 लाख रुपए खर्च कर डिसिल्टिंग करवाई गई। गड्ढे की डिसिल्टिंग का ठेका नगर परिषद के ही एक ठेकेदार को दिया गया। हालांकि इस ठेके की शिकायत भी हुई थी। शिकायत करने वाले पार्षद का आरोप था कि ठेके में नियमों की अवहेलना की गई है, लेकिन बाद में शिकायतकर्ता ही बैकफुट पर आ गया। खैर, शिकायतकर्ता के बैकफुट पर आने के जो भी कारण रहे होंगे, लेकिन नगर परिषद ने इस गड्ढे की डिसिल्टिंग के नाम पर 37 लाख रुपए का टेंडर लगा दिया, जिसमें ठेकेदार ने करीब 20 लाख रुपए का भुगतान भी उठा लिया, लेकिन इस डिसिल्टिंग में भारी घोटाला हुआ है। लोगों का आरोप है कि दो-चार ट्रालियां डिसिल्टिंग के नाम पर इतनी बड़ी राशि की बंदरबांट हुई है।
नगर परिषद की ओर से अभी इस गड्ढे की डिसिल्टिंग करवाई ही थी कि सरकारी एजेंसी आरएसआरडीसी ने इस गड्ढे में मिट्टी डालकर बंद करना शुरू कर दिया। जानकारी के अनुसार यहां पर मिनी सचिवालय के अलावा आवासीय व व्यावसायिक कॉलोनियां काटी जाएंगी। यही कारण है कि गुरुनानक बस्ती वाले इस गड्ढे का तीन चौथाई भाग आरएसआरडीसी की ओर से मिट्टी डालकर भर दिया गया है और इसे अब समतल किया जा रहा है, जबकि नगर परिषद की ओर से इसी गड्ढे की डिसिल्टिंग इसलिए करवाई गई थी क्योंकि बरसात के सीजन में इंदिरा कॉलोनी, गुरुनानक बस्ती, ब्लॉक एरिया सहित अनेक कॉलोनियों के पानी का निकासी इस गड्ढे में हो जाए और गड्ढे का पानी आगे पम्प के जरिए खेतों में डाला जाए, लेकिन इस एजेंसी के अधिकारियों ने नगर परिषद के अधिकारियों से बिना राय मशविरा किए इस गड्ढे को भरना शुरू कर दिया है।
बरसात में बिगड़ सकते हैं हालात
अब हालात यह हो गए हैं कि इस गड्ढे का एक चौथाई भाग ही बचा है। थोड़ी सी बरसात से यह गड्ढा लबालब हो जाएगा। मानसून के सीजन में अगर भारी बारिश आ गई तो गुरुनानक बस्ती, इंदिरा कॉलोनी, ब्लॉक एरिया सहित अनेक कॉलोनियों में हालात बिगड़ सकते हैं। वहीं दूसरी तरफ नगर विकास न्यास ने सद्भावना नगर गड्ढे को लगभग मिट्टी और मलबे से पाट दिया है। ऐसे में बरसाती पानी इस गड्ढे में भी नहीं जा सकेगा। हैरानी की बात तो यह है कि अभी तक सूरतगढ़ बाईपास स्थित एसटीपी भी शुरू नहीं हुई। यह एसटीपी कब शुरू होगी? इसका भी कोई पता नहीं। अगर एसटीपी भी शुरू होती तो कुछ हद तक लोगों को बरसाती पानी से राहत मिल सकती थी, लेकिन अब तो उक्त कॉलोनियां भगवान भरोसे ही हैं।

एजेंसी के अधिकारी ही जिम्मेदार
आरएसआरडीसी के अधिकारियों ने इस बारे में मुझ से कोई राय नहीं की। जिला कलक्टर को इस पूरी स्थिति के बारे में मैंने अवगत करवा दिया है। मानसून के दौरान अगर कोई कुछ गड़बड़ी हुई तो सम्बन्धित एजेंसी के अधिकारी ही जिम्मेदार होंगे।
सुनीता चौधरी, आयुक्त, नगर परिषद

सब सरकार के इशारे पर
कुछ समय पहले ही नगर परिषद ने करीब 37 लाख रुपए खर्च कर इस गड्ढे की डिसिल्टिंग इसलिए करवाई थी कि बरसात के समय शहरवासियों को कोई समस्या न हो, लेकिन सरकार ने जान बूझकर नगरपरिषद की ओर से खर्च किए गए 37 लाख रुपए को मिट्टी में मिला दिया है। यह सब सरकार के इशारे पर सभापति व नगरपरिषद जनप्रतिनिधियों को नीचा दिखाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन असलियत शहरवासी भी जानते हैं।
अजय चाण्डक, सभापति, नगरपरिषद, श्रीगंगानगर

वायदा पूरा कर रही है सरकार
मार्च माह में गंगानगर आई मुख्यमंत्री ने जल्द से जल्द पुरानी शुगर मिल की भूमि पर मिनी सचिवालय व अन्य निर्माण शुरू करने का वायदा किया था, उसी वायदे को सरकार पूरा कर रही है। इसीलिए जल्दी-जल्दी यहां भूमि समतल करने की कार्रवाई चल रही है। रही बात बरसात के पानी की निकासी की तो इसी महीने के अंत तक सूरतगढ़ रोड बाईपास स्थित एसटीपी शुरू हो जाएगा। इसके बाद इस एरिये के बरसाती पानी की समस्या नहीं रहेगी।
संजय महीपाल, चेयरमैन, नगर विकास न्यास

Amit Khan
I am a enthusiastic journalist and work for day and night to aware people about new events and local problems about your city and state.

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