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वाटरवक्र्स की लैब नहीं बता सकती कि पानी में कितना ‘जहर’? -केवल पानी के मूलभूत अवयवों की ही होती है जांच -पानी का रंग देखकर तय हेाती है शुद्धता और अशुद्धता -बरसों पुराने तरीके से साफ होता है केमिकल युक्त पानी

श्रीगंगानगर। हमारा देश भले ही डिजीटल इंडिया के जमाने में हो, लेकिन जलदाय विभाग के पानी फिल्टर की तकनीक आज भी देसी जुगाड़ यानि बरसों पुरानी है। इस कम्प्यूटराइज्ड व टैक्नीकल युग में भी जलदाय विभाग का फिल्टर प्लांट नहीं बदला है। यही कारण है कि पंजाब के फाजिल्का जोन के बाद कैंसर जैसी सबसे घातक बीमारी श्रीगंगानगर जिले में लगातार बढ़ रही है। पंजाब की ओर से राजसथान की नहरों में आना वाले पानी में पंजाब की फैक्ट्रियों के केमिकल सहित कई अपशिष्ट मिले होते हैं। जलदाय विभाग की लैब में पानी में घुले इन केमिकल या अपशिष्ट को चैक करने की भी फिलहाल सुविधा नहीं है। यहां सिर्फ पानी में मिलने वाले अवयवों की मात्रा ही चैक होती है। इसके अलावा पानी में क्या केमिकल मिलाया गया है, इसकी जांच करने के लिए जलदाय विभाग के पास लैब नहीं है। गत दिनों जब पंजाब से लाल रंग का दूषित पानी नहरों में आया तो जलदाय विभाग ने ‘पानी का रंग पीला है, इसलिए पीने योग्य नहीं है’ कहकर इतिश्री कर ली।
कहने को तो पिछले साल ही सरकार की तरफ से जलदाय विभाग को करीब पचास लाख रुपए का आलीशन भवन दिया गया है, जिसमें जलदाय विभाग की लैब संचालित है। लैब प्रभारी कुमारी प्रभा बंसल ने बताया कि इस लैब में सिर्फ पानी का गंदलापन, पीएच, डीटीएस, एल्टीनिटी, हार्डनेस, सल्फेट, फ्लोराइड व नाइट्रेट की मात्रा ही चैक की जाती है। यानि नेचुरल पानी में जो अवयव होते हैं, उसी की मात्रा इसी लैब में चैक की जाती है। इसके अलावा पानी में और क्या मिला है, इसकी जांच यहां उपलब्ध नहीं है। बकौल लैब प्रभारी मान लीजिए अगर पानी में किसी ने जहर मिला दिया तो यहां की लैब में चैक नहीं किया जा सकता कि पानी में कितने प्रतिशत जहर मिला हुआ है? इसके अलावा पानी में पेस्टीसाइड पॉयजनिंग व हेवी मैटीरियल टेस्टिंग की सुविधा भी यहां नहीं है। लैब प्रभारी के अनुसार यह सुविधा राजस्थान के जलदाय विभाग की किसी भी लैब में उपलब्ध नहीं है। उन्होंने बताया कि इसी महीने हैवी मैटीरियल टेस्टिंग लैब लगाने की अनुमति विभाग ने ली है, जिसका टेंडर भी हो चुका है। इसके अलावा पेस्टीसाइड पॉयजनिंग लैब लगाने का टेंडर विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश की राजधानी में ही यह सुविधा नहीं है तो गंगानगर में ऐसी लैब होने का सवाल नहीं उठता। वैसे ऐसी लैब गंगानगर में होनी बहुत जरूरी है क्योंकि यहां का एरिया लगभग नहरी है। गंगानगर व हनुमानगढ़ जिले के लोग सिर्फ नहरी पानी ही पीने में प्रयोग करते हैं और नहरों में पानी पंजाब से आता है जिसमें केमिकल मिले होते हैं। यहां कुएं का पानी यहां पीने में प्रयोग नहीं किया जाता।
मोटे खर्चे के बावजूद भी रिजल्ट नहीं
श्रीगंगानगर की जलदाय विभाग की लैब पर हर माह सरकार लाखों रुपए खर्च करती है। इस लैब में फिलहाल चार कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें लैब प्रभारी कुमारी प्रभा बंसल भी शामिल हैं। उनके अलावा यहां दो लैब टेक्नीशियन व एक टेक्नीशियन सहायक के पद पर कर्मचारी कार्यरत है। इसके अलावा एक बाबू व एक सीनियर लैब टेक्नीशियन का पद खाली है। वैसे तो सीनियर लैब टेक्नीशियन के पद पर पूर्व में एक कर्मचारी तैनात था, लेकिन विभागीय कार्यों के चलते उन्हें जयपुर पदस्थापित किया गया है। वर्तमान में यहां चार ही कर्मचारी कार्यरत हैं। इन चारों पर हर माह करीब डेढ़ से दो लाख रुपए वेतन के रूप में जलदाय विभाग खर्च करता है। इसके अलावा लैब में पानी, दवाएं या अन्य संसाधनों पर भी लाख-डेढ़ लाख रुपए खर्च होता है। यानि चार-पांच लाख रुपए प्रति माह लैब में टेस्टिंग के नाम पर जलदाय विभाग द्वारा खर्च किया जाता है, लेकिन समस्या आज भी जस की तस है। जलदाय विभाग की डिग्गी में आज भी कोई जानलेवा केमिकल घोल जाए तो यहां की लैब टेस्ट में यह साफ नहीं हो पाएगा कि पानी में उसकी मात्रा कितनी है?
रंग देखकर ही किया था फैसला
लैब प्रभारी ने बताया कि कुछ दिन पहले जो दूषित पानी पंजाब की ओर से नहरों में छोड़ा गया उसका रंग देखकर ही अधिकारियों ने वाटर वक्र्स की डिग्गियों में नहीं डालने का निर्णय लिया था। अगर वास्तव में इस बात पर सच्चाई हो तो फिर विभाग के अधिकारियों, रसायन विभाग के अफसरों तथा आम इंसान में क्या फर्क रह जाता है? एक अनपढ़ व्यक्ति भी पानी का रंग देखकर बता सकता है कि यह पानी पीने के लायक है या नहीं? लैब प्रभारी के अनुसार पीने योग्य पानी मापदंड के अनुसार रंगहीन होना चाहिए और पिछले दिनों जो पानी नहरों में आया था उसका रंग सौ प्रतिशत से भी ज्यादा था। उन्होंने बताया कि बुधवार को इन नहरों में आ रहे पानी के रंग में फर्क पड़ा है। बुधवार लिए गए सैम्पल की जांच में रंग जीरो प्रतिशत आया है। पीने योग्य पानी में जीरो प्रतिशत रंग ही होना चाहिए। उन्होंने बताया कि पानी में गंदलापन अभी भी मौजूद है, जो फिल्टर के जरिए दूर किया जा सकता है।
आज भी बरसों पुरानी तकनीक
हैरानी की बात तो यह है कि जलदाय विभाग के पास पानी शुद्धिकरण के लिए आज भी बरसों पानी तकनीक है। विभाग की ओर से आज भी बजरी, ग्रिट से पानी छानकर ही फिल्टर किया जाता है। साथ ही क्लोरीन भी पानी में मिलाई जाती है, जबकि क्लोरीन सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। क्लोरीन कुछ मा9ा तक तो पानी में सही है। क्लोरीन से पानी में खतरनाक जीवाणु मर जाते हैं, लेकिन अगर क्लोरीन की थोड़ी सी मात्रा पानी में बढ़ जाए तो यह पानी मेें ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देती है। दो दिन पहले काले रंग का जो केमिकल युक्त पानी नहरों में आया था, उसमें भी ऑक्सीजन की मात्रा बिल्कुल कम थी।
‘ओके’ रिपोर्ट बिना ही डिग्गियों में भंडारण
लैब प्रभारी की ओर से बुधवार को लिए गए सैम्पल की जांच के बाद भी हरी झंडी नहीं दिखाने के बावजूद बुधवार को एक्सईन ने डिग्गियों में पानी भण्डारण के आदेश दे दिए। इस मामले में दोनों ही अधिकारियों के विरोधाभासी सामने आए हैं। जलदाय विभाग की ओर से बुधवार सुबह लगभग 11:30 बजे डीएवी स्कूल के पास स्थित वाटर वक्र्स की डिग्गियों में पंजाब से आ रहे नहरी पानी को डाल दिया गया। यानि इस पानी का भंडारण जलदाय विभाग करने लग गया है। हालांकि यह पानी सप्लाई के लिए अभी तक नहीं छोड़ा गया है। जलदाय विभाग के एक्सईएन वीके जैन का कहना है कि इस पानी को दो दिन तक शुद्ध करने के बाद ही सप्लाई के लिए छोड़ा जाएगा, लेकिन सवाल यह उठता है कि यह पानी किसके कहने पर डिग्गी में डालना शुरू किया? लैब प्रभारी प्रभा बंसल के अनुसार बुधवार सुबह 11 बजे साधुवाली नहर से पानी का सैम्पल लिया, जिसमें पानी रंगहीन पाया गया, यानि पहले जिस पानी का रेशो 100 प्रतिशत था, अब वह जीरो प्रतिशत रंग पर है, इसके अलावा पानी में गंदलापन जरूर है, लेकिन टीडीएस, फ्लोराइड, नाइट्रेट, पीएच, हार्डनेस व सल्फेट की मात्रा सही है। उन्होंने बताया कि सुबह 11 बजे की जांच में उन्होंने ठीक वैसा ही पानी पाया है, जैसा करीब 15 दिन पहले सप्लाई के लिए लोगों को दिया जा रहा था, लेकिन उन्होंने कहीं भी पानी का भंडारण करने की अनुमति नहीं दी। बंसल के अनुसार जलदाय विभाग के उच्च अधिकारियों ने उनसे भंडारण की राय भी नहीं मांगी है। उधर, सिटी एक्सईएन वीके जैन का कहना है कि रसायन अधिकारियों की राय पर ही लैब की जांच के बाद बुधवार सुबह 11:30 बजे से वाटर वक्र्स की डिग्गी में पानी का भंडारण शुरू कर दिया है। जब उनसे फिर पूछा गया कि क्या लैब के अधिकारियों ने पानी भंडारण करने की राय दी है तो एक्सईएन जवाब को गोलमोल कर गए। उनका कहना था कि अभी कौनसा यह पानी लोगों को सप्लाई दिया जा रहा है? इस पानी को दो दिन तक रखकर इसका शुद्धिकरण किया जाएगा। जांच के बाद ही पानी की सप्लाई की जाएगी।

इनका कहना है–
मुझसे राय नहीं मांगी
बुधवार सुबह मैंने पानी के सैम्पल की जांच की थी, लेकिन अधिकारियों को पानी भण्डारण के लिए नहीं कहा था। मुझे नहीं पता कि किस जांच रिपोर्ट के आधार पर अधिकारी ने डिग्गियों में पानी का भण्डारण करवाया है।
-प्रभा बंसल, लैब प्रभारी, जलदाय विभाग

राय के बाद ही भण्डारण
रसायन अधिकारियों की राय पर ही डिग्गियों में पानी का भण्डारण शुरू करवाया गया है। पानी को दो दिन रखकर शुद्धिकरण के बाद ही सप्लाई किया जाएगा।
-वीके जैन, एक्सईएन, जलदाय विभाग

Amit Khan
I am a enthusiastic journalist and work for day and night to aware people about new events and local problems about your city and state.

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