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पौने दो साल बाद शुरू हुई गिरफ्तारियां -पोस्टमैन भर्ती फर्जीवाड़ा – यूपी स्कूल बोर्ड की फर्जी मार्केशीट से किया था फर्जीवाड़ा

श्रीगंगानगर। श्रीगंगानगर के बहुचर्चित पोस्टमैन भर्ती फर्जीवाड़े में पौने 2 वर्ष बाद पुलिस ने गिरफ्तारियां आरम्भ कर दीं। इस फर्जीवाड़े में 41 युवक-युवतियों ने उत्तर प्रदेश स्कूल बोर्ड, इलाहाबाद की फर्जी अंकतालिकाओं के आधार पर डाक वितरण वाहक (पोस्टमैन) पद की नियुक्तियां पा ली थीं। डाक विभाग ने इनको नियुक्ति पत्र जारी कर दिये। यही नहीं, इनका पदस्थापन भी कर दिया था, लेकिन पदभार ग्रहण करने से पहले ही इस फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हो गया। अगस्त 2016 में स्थानीय डाक अधीक्षक बीएल मीणा की एक रिपोर्ट पर जवाहरनगर थाना पुलिस ने इन 41 जनों के खिलाफ जालसाजी व धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। करीब पौने 2 वर्षांे से इस मामले की जांच चल रही थी। अब जाकर गिरफ्तारियां शुरू हुई हैं। बुधवार को पुलिस ने पांच युवकों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया। इन सबको न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। जवाहरनगर थाना प्रभारी प्रशांत कौशिक ने इस मामले में चक 3 ई छोटी में गली नं. 6 निवासी सुनील पुत्र मोहनलाल ब्राह्मण और गांव नेतेवाला के जगदीश पुत्र मंगतूराम लखारा, सुरेश पुत्र लीलूराम जाट व सुरेन्द्र पुत्र सुभाष ब्राह्मण निवासी ललाना, थाना गोगामेड़ी तथा जयपाल पुत्र धन्नाराम मेघवाल निवासी श्योराटाडा थाना भादरा जिला हनुमानगढ़ को गिरफ्तार किया। पुलिस ने बताया कि अभी 37 जनों की गिरफ्तारियां बाकी हैं। इनमें चार-पांच युवतियां भी हैं।
54 अभ्यर्थियों मेें से 41 की मार्कशीट फर्जी
डाक विभाग ने 54 पोस्टमैन के लिए आवेदन आमंत्रित किये थे। पुलिस ने बताया कि पोस्टमैन की यह नियुक्तियां मेरिट के आधार पर होनी थीं। प्राप्त हुए आवेदनों के आधार पर डाक विभाग के अधिकारियों ने मेरिट बनाई। इस मेरिट के आधार पर 54 अभ्यर्थियों का चयन कर लिया गया। मैरिट के अनुसार ही उन्हें नियुक्ति पत्र जारी कर दिये गये। फिर इनका पदस्थापन भी कर दिया गया। इससे पहले कि यह चयनित अभ्यर्थी अपना पद्भार ग्रहण करते, उससे पहले डाक विभाग के सतर्कता प्रकोष्ठ की फर्जीवाड़े पर नजर पड़ गई। दरअसल जिन 54 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, उनमें से 41 अभ्यर्थियों का चयन उत्तर प्रदेश स्कूल बोर्ड इलाहाबाद द्वारा जारी की गई अंकतालिकाओं के आधार पर हुआ था। यूपी स्कूल बोर्ड की इतनी अंकतालिकाओं पर एक साथ 41 अभ्यर्थियों का चयन होना सतर्कता प्रकोष्ठ को खटक गया। इन अंकतालिकाओं की गोपनीय रूप से जांच की गई। तब उजागर हुआ कि यूपी स्कूल बोर्ड ने इन अंकतालिकाओं को जारी ही नहीं किया। पुलिस के अनुसार दसवीं और बारहवीं कक्षाओं की इन अंकतालिकाओं पर जो अनुक्रमांक अंकित किये हुए थे, वह यूपी स्कूल बोर्ड के रिकॉर्ड में किसी और के नाम थे। बोर्ड द्वारा इन अंकतालिकाओं के जाली होने का लिखित में दिये जाने के बाद डाक अधीक्षक ने फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज करवाया।
डाक विभाग के कर्मचारी शामिल
इस फर्जीवाड़े मेें डाक विभाग के कतिपय कर्मचारी भी लिप्त हैं। गिरफ्तार किये गये चक 3 ई छोटी के युवक सुनील के परिजनों ने बुधवार को जवाहरनगर थाना में हुई बातचीत में बताया कि 2016 में पोस्टमैन की नियुक्ति के लिए एक डाकिये ने ही उनसे सम्पर्क किया था। मूल रूप से भादरा तहसील क्षेत्र के इस डाकिये ने ही स्कूल के परिवार वालों को फर्जी अंकतालिका मुहैया करवाई। इसके बदले में उसने एक लाख रुपये लिये। इन परिजनों के अनुसार इस मामले में जो 41 अभ्यर्थी फंसे हैं, उन्हें अन्य लोगों ने अपने जाल में फंसाया था। यह फर्जीवाड़ा करने वालों में भादरा क्षेत्र के मूल निवासी डाकिया के अलावा भी डाक विभाग के कुछ कर्मचारी व अन्य लोग शामिल हैं। सुनील के पिता पदमपुर रोड कल्याण भूमि में पंडित हैं। उन्होंने बताया कि सुनील ने दसवीं की पढ़ाई यहां एक निजी स्कूल में की थी। फिर स्नातक की डिग्री राजकीय महाविद्यालय से प्राप्त की। इन दिनों वह लोको पायलट की भर्ती के लिए तैयारी कर रहा था। उधर पुलिस ने बताया कि इस मामले में उन लोगों को भी गिरफ्तार किया जायेगा, जिन्होंने फर्जी अंकतालिकाएं बनाईं। यह लोग चाहें डाक विभाग के हों या फिर कोई और।
धीमी गति से चल रही थी जांच
डाक विभाग को हिला देने वाले इस मामले की फाइल जवाहरनगर थाना में करीब डेढ़ वर्ष से दबी पड़ी थी। इस थाने से हाल ही एक विवाद के चलते हटाये गये सीआई शकील अहमद इस मामले की बेहद सुस्ती से जांच कर रहे थे। जांच के नाम पर इस मामले को एक तरह से अटकाकर छोड़ा हुआ था। मामला दर्ज होने के बाद जांच काफी तेजी से शुरू की गई। फर्जीवाड़े के प्रमाणित दस्तावेज पुलिस ने हासिल कर लिये थे। सभी 41 जनों को दोषी मान लिया गया था, लेकिन जब गिरफ्तारियों की बात आई, तो जांच अधिकारी-शकील अहमद ढीले पड़ गये। पिछले माह होली से पहले शकील अहमद को इस थाने से हटाया गया, उनकी जगह नवनियुक्त हुए तेज-तर्रार इंस्पेक्टर प्रशांत कौशिक ने आते ही इस पुरानी दफन फाइल को बस्ते से निकाला। इसके साथ ही गिरफ्तारियां शुरू कर दीं।

Amit Khan
I am a enthusiastic journalist and work for day and night to aware people about new events and local problems about your city and state.

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