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पार्टियों से बगावत कर सकते हैं उम्रदराज नेता – जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों की लिस्टें दिनों-दिन हो रही लम्बी – उप चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस की टिकट की मांग बढ़ी – डैमेज कंट्रोल के लिए भाजपा के शीर्ष नेता लगातार कर रहे हैं मंथन -नोट: यदि मिल जाएं तो सभी बॉक्स में विधानसभा के नक्शे लगा लें—

श्रीगंगानगर। भारतीय जनता पार्टी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी जिस तरह अपनी-अपनी पार्टियों में युवाओं को महत्व दे रहे हैं, उससे लगता है कि इस बार उम्रदराज नेता पार्टियों से बगावत करेंगे, जिनमें ज्यादातर 70 साल पार उम्र वाले नेता होंगे। इन नेताओं की लिस्ट में कई दिग्गज भी हो सकते हैं। जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर भी दोनों पार्टियों को बगावत का खतरा सता रहा है। इन सीटों पर उम्मीदवारों की लिस्ट दिनों दिन बढ़ रही है। उपचुनाव नतीजों के बाद राजनीतिक माहौल थोड़ा बदला है। कांग्रेस टिकट की अब डिमांड बढ़ गई है। इसी को मद्देनजर रखते हुए भाजपा के शीर्ष नेता डैमेज कंट्रोल करने के लिए लगातार मंथन कर रहे हैं।
इस वक्त दो विधानसभा सीटों को छोडक़र गंगानगर जिले में सभी पर भाजपा के विधायक हैं, जिन दो सीटों पर भाजपा का कब्जा नहीं, उनका भी भारतीय जनता पार्टी को ही समर्थन है। कुल मिलाकर जिले की सभी सीटों पर लगभग भाजपा का ही दबदबा है, फिर भी भाजपा नेता अगले विधानसभा चुनावों को लेकर अभी से हार के डर से भयभीत हैं। अलवर, अजमेर उप चुनाव के जो नतीजे आए हैं, उससे साफ नजर आ रहा है कि इस बार प्रदेश में दोबारा भारतीय जनता पार्टी की सरकार नहीं बनेगी। राजनीतिक संकेत लग रहे हैं कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन सकती है, हालांकि विधानसभा चुनावों में अभी करीब नौ महीने पड़े हैं, लेकिन इस वक्त माहौल भाजपा के विपरीत है।
गंगानगर विधानसभा क्षेत्र की बात की जाए तो यहां भले ही भारतीय जनता पार्टी का विधायक न हो, लेकिन विधायक कामिनी जिन्दल का भाजपा को पूरा समर्थन है। माना जा रहा है कि इस बार भाजपा टिकट भी कामिनी जिन्दल को ही मिलेगी। यह अलग बात है कि विधायक कामिनी जिन्दल का जनाधार खिसक गया है। कामिनी को जितने वोट पिछली बार मिले थे, उसका चौथा हिस्सा वोट भी अब मिलना मुश्किल लग रहा है। इसके अलावा भाजपा टिकट के लिए कई उम्मीदवार लाइन में हैं, जिनमें भाजपा नेता प्रहलादराय टाक, यूआईटी अध्यक्ष संजय महीपाल, महेश पेड़ीवाल, पूर्व मंत्री राधेश्याम गंगानगर आदि शामिल हैं। इसके अलावा और भी दर्जनों नेता टिकट के लिए दावा जता रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस तरह युवाओं की पैरवी कर रहे हैं, उससे साफ नजर आ रहा है कि पूर्व मंत्री राधेश्याम गंगानगर के नाम टिकट वाली लिस्ट से बाहर हो सकता है। इसके अलावा इन दिनों राधेश्याम के मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे से भी राजनीतिक सम्बन्ध ज्यादा अच्छे नहीं है। यूआईटी अध्यक्ष संजय महीपाल को टिकट नहीं मिलने की संभावनाएं इसलिए कम हैं कि उन्हें नगर विकास न्यास की चेयरमैनी देकर पहले ही पार्टी ने एहसान कर दिया। प्रहलादराय टाक व महेश पेड़ीवाल दोनों को ही पार्टी जिताऊ उम्मीदवार नहीं मान रही। इसलिए इनको भी टिकट मिलने के चांस कम लग रहे हैं, अगर भारतीय जनता पार्टी कामिनी जिन्दल को गंगानगर से उम्मीदवार बनाती है तो पार्टी को बड़े स्तर पर बगावत का खतरा है।
इसी तरह कांग्रेस की लिस्ट में भी बगावत करने वालों की कमी नहीं। राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अगर टिकट के लिए उम्र की सीमा निर्धारित कर दी तो गंगानगर विधानसभा क्षेत्र की सीट से पार्टी को भाजपा से ज्यादा बगावत का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल इस वक्त गंगानगर विधानसभा सीट के लिए नगर विकास न्यास के पूर्व अध्यक्ष राजकुमार गौड़, पूर्व सभापति जगदीश जान्दू, बिहाणी शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष जयदीप बिहाणी, नगर विकास न्यास के पूर्व अध्यक्ष ज्योति कांडा, विक्रम चितलांगिया तथा युवा नेता अंकुर मिगलानी दावा जता रहे हैं। उक्त दावेदारों में राजकुमार गौड़ व जगदीश जान्दू को टिकट मिलने के चांस कम लग रहे हैं। गौड़ को पार्टी वर्ष 2012 में टिकट देकर परिणाम देख चुकी है, वहीं पिछली बार जगदीश जान्दू की जमानत जब्त हो गई थी। इस बार जयदीप बिहाणी या अंकुर मिगलानी पर कांग्रेस दांव खेल सकती है, लेकिन दोनों नेताओंं का जनाधार फिलवक्त तो कम है।कांग्रेस को भी बागियों का काफी खतरा रहेगा। वैसे गंगानगर विधानसभा को अरोड़ा बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है। संभवत: दोनों पार्टियां इसी बिरादरी के दावेदार को मैदान में उतारेंगी।
सादुलशहर
सादुलशहर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा इस बार भी पूर्व मंत्री गुरजंटसिंह को ही उम्मीदवार बनाएगी, ऐसा संभावित है। यह अलग बात है कि पिछले विधानसभा की अपेक्षा गुरजंटसिंह के वोट बैंक में इस बार काफी गिरावट आई है, लेकिन सादुलशहर क्षेत्र में भाजपा गुरजंट सिंह के टक्कर का कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं मान रही। पिछली बार डॉ. बृजमोहन सहारण व कृष्ण मंदेरां ने पार्टी से बगावत की थी, लेकिन दोनों पार्टी को कोई ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा सके। इसलिए सादुलशहर से इस बार भी पार्टी गुरजंटसिंह को ही उम्मीदवार बना सकती है। यहां कांग्रेस की टिकट को लेकर अभी तक कुछ भी नहीं कहा जा सकता। सादुलशहर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की टिकट के लिए कांगे्रस जिलाध्यक्ष संतोष सहारण, जगदीश जांगिड़, ओम बिश्नोई, कृष्ण भांभू सहित कई कांग्रेसी दावा जता रहे हैं। वैसे जगदीश जांगिड़ के दिल्ली में कांग्रेस के शीर्ष नेताओं से अच्छे सम्बन्ध होने के कारण वे टिकट ला सकते हैं, लेकिन उन्हें पिछली बार टिकट मिली थी, इस बार उन्हें टिकट मिलने की संभावना नहीं है। इस बार संतोष सहारण या ओम बिश्नोई को टिकट मिल सकती है, लेकिन दोनों दावेदार का वोटरों पर कुछ खास प्रभाव नहीं, इसलिए पार्टी इन्हें टिकट देने से पहले काफी सोच विचार करेगी।
श्रीकरणपुर
श्रीकरणपुर विधानसभा क्षेत्र से इस बार भी भाजपा मौजूदा मंत्री सुरेन्द्रपालसिंह टीटी को ही उम्मीदवार बना सकती है। टीटी के अलावा पूर्व जिलाध्यक्ष बहादरचंद नारंग, पूर्व मंत्री कुन्दनलाल मिगलानी, हंसराज पूनिया, महेन्द्र रस्सेवट सहित कई नेता टिकट की लाइन में हैं, लेकिन पार्टी संभवत: इन्हें टिकट नहीं देगी, हालांकि यहां पर टीटी के खिलाफ वोटरों में जबरदस्त आक्रोश है, जिसका खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ सकता है, वैसे यहां से भी भाजपा को बगावत का खतरा है। यहां से महेन्द्र रस्सेवट व हंसराज पूनिया बगावत कर सकते हैं। इसी तरह श्रीकरणपुर विधानसभा क्षेत्र में फिर से खम्भा कांग्रेस यानि गुरमीतसिंह कुन्नर को पार्टी टिकट दे सकती है। इस बार कुन्नर की जीत इतनी आसान नहीं है। कुन्नर के पुराने बिजनेस पार्टनर घनश्याम दास ही उनके धुर विरोधी बने बैठे हैं। इसके अलावा इकबाल सिंह भंडाल से भी कुन्नर को काफी खतरा है। भंडाल के सिर पर घनश्याम दास का हाथ है। भंडाल के अनुसार इस बार पार्टी उन पर दाव खेल सकती है, लेकिन अभी भी कांग्रेस की टिकट के लिए कुन्नर का पलड़ा भारी दिख रहा है।
रायसिंहनगर
रायसिंहनगर विधानसभा सीट पर भाजपा में फिर से बगावत होगी। यहां पर पूर्व केन्द्रीय मंत्री निहालचंद मेघवाल के भाई लालचंद व बलवीर लूथरा में टिकट के लिए घमासान होगा। यह भी माना जा रहा है कि यहां से भाजपा जमींदारा पार्टी की विधायक सोना देवी बावरी को अपना उम्मीदवार बना सकती है। इस सीट से कांग्रेस के पूर्व विधायक दौलतराज नायक उम्मीदवारी जता रहे हैं। इसके अलावा कांग्रेस के अन्य कई नेता भी इस सीट पर टिकट की लाइन में हैं।
अनूपगढ़
इसी तरह अनूपगढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा की टिकट के लिए विधायक शिमला देवी बावरी, प्रियंका बैलाण, पूर्व विधायक ओपी महेन्द्रा जहां दावा जता रहे हैं, वहीं कांग्रेस की टिकट के लिए कुलदीप इन्दौरा, सोहन नायक आदि दौड़ में हैं। यहां पर कामरेडों का अच्छा वोट बैंक होने के कारण पवन दुग्गल से दोनों पार्टियों को खतरा बना हुआ है।
सूरतगढ़
सूरतगढ़ विधानसभा सीट पर वैसे तो फिलहाल भाजपा का कब्जा है, लेकिन इस वक्त भाजपा विधायक राजेन्द्र भादू का काफी विरोध है। एटा सिंगरासर आन्दोलन के बाद राजेन्द्र भादू का वोट बैंक बहुत ज्यादा खिसक गया। भादू के अलावा यहां से पूर्व विधायक अशोक नागपाल, गुरदर्शनसिंह सोढ़ी, नीलम सांगवान सहित कई भाजपा नेता टिकट का दावा जता रहे हैं। इसी तरह कांग्रेस की टिकट के लिए पूर्व विधायक गंगाजल मील सहित अनेक कांग्रेसी नेता भागदौड़ कर रहे हैं।
वैसे जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर इस बार दोनों पार्टियों को बागियों से ज्यादा खतरा रहेगा। कई विधानसभा सीटों पर तो बागी आर्थिक दृष्टि से काफी मजबूत हैं तो कई सीटों पर बागियों का वोट बैंक ज्यादा है। इसलिए दोनों पार्टियों को टिकट वितरण के लिए काफी माथा पच्ची करनी पड़ेगी।

Amit Khan
I am a enthusiastic journalist and work for day and night to aware people about new events and local problems about your city and state.

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